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किसान की दुर्दशा और सरकार की वादाखिलाफी: प्रीती चौबे

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किसान की दुर्दशा और सरकार की वादाखिलाफी: प्रीती चौबे

2014 में #लोकसभाचुनाव के दौरान तमाम चुनावी रैलियों में स्वयं आज के #प्रधानमंत्री ने किसानो के न्यूनतम समर्थन मूल्य,किसानो की आय पर तमाम वादों की बौछार कर दी थी…जबकि सर्वविदित हैं सरकार आने के तुरंत बाद एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जब इस मुद्दे पर बात हुई तो सरकार #सुप्रीमकोर्ट में तुरंत पलटी मार दी और खुद कहा की ये व्यवहारिक नही हैं….ख़ैर इसे छोड़िये बात #उत्तर_प्रदेश की करते हैं… मोदी जी ने चुनावी रैली में गन्ना किसानो को 14 दिन में भुगतान की बात की फिर सरकार बनने के बाद ऐसा होता नही दिखाई दिया और ये भी एक #जुमला ही साबित हुआ।
पेराई सत्र बीत जाने के बावजूद चीनी मिलो पर किसानो का 2500 करोड़ से ज्यादा जिसमे #सहकारीसंस्था पर करीब 400 करोड़ और #निजीसंस्थानों पर 2000 करोड़ से ज्यादा अभी तक बकाया हैं
अर्थात गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान कराने में योगी सरकार पूरी तरह विफल रही और योगी सरकार ने गन्ना भुगतान के मसले पर किसानों से वादाखिलाफी की ये साफ़ प्रतीत हो रहा हैं।

#मार्च के आखिरी में गन्ना
मंत्री ने गन्ना विकास विभाग के मुख्यालय में प्रदेश के अधिकारीयों तथा चीनी मिलो के हेड के साथ हुए समीक्षा बैठक के बाद जो जानकारी दी उसमे 23 अप्रैल तक पूर्ण भुगतान की बात की गयी जो सिर्फ वादा साबित हुई। अगर गेंहू की बात करे तो सरकार द्वारा घोषित लक्ष्य से आधा गेंहू भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नही ख़रीदा जा सका है।जिसके चलते

#किसानो को अपना गेंहू व्यापारियो को कम दाम पर बेचना पड़ा हैं। प्रदेश की कुल गेंहू की पैदावार का सिर्फ़ 11 प्रतिशत ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ख़रीदा गया हैं..जबकी सरकार ने खरीद कंपनियो को भारी भरकम अग्रिम धनराशि भी जारी कर दी थी। नोटबंदी की मार झेल रहे किसानो को अगर गेहू का न्यूनतम मूल्य भी मिल जाता तो भी उन्हें काफी राहत पहुँचती। कर्जमाफी के फैसले पर भी भ्रम की स्तिथि बनी हुई हैं करीब 2 माह होने के बावजूद भी कोई सरकरी नोटिस जारी नही हुआ हैं बैंको के नाम..कर्ज वसूली के लिए किसानो की धरपकड़ जारी है..फिर उसमे भी कर्ज अवधि की सीमा सिरदर्द साबित हो रही हैं।
अगर कर्ज माफ़ ही करना था तो मार्च 2017 तक का किया जाता जिससे अधिक किसानो को लाभ पहुँचता..जबकी भारतीय जनता पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में लघु-सीमांत किसानो के सभी कर्ज को माफ़ करने की बात की गयी थी। लेकिन वादाखिलाफी यहाँ भी की गयी। योगी सरकार के 100 दिन किसानो के साथ #धोखाधड़ी के 100 दिन साबित हुए हैं l

” यदि किसान को अपने फसल में लगे लागत से 50% अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता तो किसान को करीब प्रतिवर्ष 2 लाख करोड़ रूपये अधिक मिलते।पिछले 70 साल में लगभग यह राशि लगभग 130 लाख करोड़ बनती है।यह राशि आज देश पर किसानों का क़र्ज़ है।सरकार को चाहिए की देश पर जो किसानों का ऋण है उसके एवज़ में सरकार किसानों के द्वारा की जा रही कर्ज माफ़ी की माँग को स्वीकार करें तथा उनके फसल का लागत से 50% अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करें, जिससे कि देश का किसान सर उठा कर जी सके।

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प्रीति चौबे, राष्ट्रीय सचिव समाजवादी युवजन सभा(समाजवादी पार्टी)

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