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नोटबंदी की बरसी – प्रीति चौबे

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नोटबंदी की बरसी – प्रीति चौबे

8 नवम्बर 2016 को देश के स्वघोषित प्रधान सेवक ने जनता के लिए एक तुगलकी फरमान जारी करवाया जिसमें उन्होंने 500 और 1000 के नोटों को गैर कानूनी बताया,, केन्द्र सरकार का नोटबन्दी का फैसला दुःखद ही नही देश की गरीब जनता से छलावा व धोखा था। नोटबन्दी का असली कारण जनता के सामने आ गया,, दरसल नोटबन्दी अमीर उधोगपतियों और पैसे वाले लोगों के काले धन को सफेद करने का माध्यम थी, नोटबन्दी आर्थिक आतंकवाद के जैसा प्रतीत होता है,,

नोटबन्दी सरकारी डकैती कानूनी व संगठित लूट की तरह साबित हुई,, नोटबन्दी से न ही काला धन आया न ही काला धन नष्ट हुआ नोटबन्दी से न आतंकवाद कम हुआ न ही भ्रष्टाचार में कोई कमी आई,, जब कि मोदी जी के द्वारा यह वादा किया गया था,, कि केवल 50 दिन देश वासियों को दिक्कत होगी,और नोटबन्दी सफल साबित होगी, काला धन नष्ट हो जाएगा, सीमा पर आतन्कवाद कम होगा देश की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, देश विकास के मार्ग पर आगे बढेगा, करोड़ो लोगों को रोजगार मिलेगा, उनके ही एक मंत्री का दावा करते हैं कि नोट बन्दी से देह व्यापार कम हुआ है लेकिन मोदी की जी के द्वारा किया गया नोटबन्दी का फैसला पूरी तरह विफल साबित ही नही हुआ बल्कि नोटबन्दी से देश में 30 लाख लोग बेरोजगार हो गए पहले से 4 गुना देह व्यापार मे बढ़ोतरी पायी गयी, नोटबन्दी से 328 लोगों की जान चली गयी नोटबन्दी से न तो आतंकवाद कम हुआ,, न भ्रष्टाचार कम हुआ,, नोटबन्दी के बाद कुछ दिन के लिए पत्थरबाजी आतंकवाद रुक गया तो मोदी जी समझे कि आतंकवाद खत्म हो गया लेकिन वो भूल गए कि अमीरो और उधोगपतियों की भांति आतंकी भी काले धन को सफेद करने में जुटे थे,, जैसे ही वो अपने काले धन को सफेद कर पाए वैसे ही आतन्कवाद पहले से ज्यादा बढ़ गया,,

नोटबन्दी के बाद मोदी जी ने जी एस टी को बगैर तैयारी के लागू किया जिससे छोटे मंझोले व्यापारी बर्बाद हो गए,, टैक्स इतना ज्यादा लगा दिया, कि आम जनता और व्यापारियों की कमर टूट गई, जिसका परिणाम ये हुआ कि देश की जी डी पी 2% प्रतिशत गिर गई और देश को गर्त की ओर ढकेल दिया गया,,

मैं मोदी जी के जनविरोधी इन दोनों फैसलों की कड़ी निंदा करती हूँ मोदी जी ने राजनीतिक लाभ के लिए पैसे निकालने के लिए अपनी माँ को लाइन में लगा दिया बेटे को माँ का सहारा होना चाहिए,, कि बुढ़ापे में उसका बेटा उसका ध्यान रखने के बजाय उसे उसके हाल पर छोड़ दे हा अगर मोदी जी खुद लाइन में लगकर पैसे निकालकर माँ को देते तो हम जरूर तारीफ कर देते की लायक बेटा है,, बेटा प्रधानमंत्री हो या चपरासी अगर अपनी माँ का ध्यान नही रखता तो उसका किसी भी पद पर होना व्यर्थ है l

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प्रीति चौबे, राष्ट्रीय सचिव समाजवादी युवजन सभा(समाजवादी पार्टी)

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